Saturday, 16 May 2020

पति पत्नी और "वो"



पति पत्नी और वो....
किस्से तो बहुत सुने होंगे,
कई जिए भी होंगें,
किसी को करीब से देखा होगा, 
कभी इस अपने का कन्धा बन कर जिया होगा,
बेवफाई के फ़साने बड़े आज़िल हैं इस जहाँ-ए-उल्फ़त  में। 
हर बैठक हर मुलाकात में,
हर फ़ोन कॉल और आजकल की व्हाट्सप्प चैट में,
कहीं न कहीं किसी न किसी गुफ्तगु में,
बेवफ़ाई के किस्से अलहद ही मशहूर हैं। 
पर ये "वो" है कौन.... 
"वो" .....  "कोई" भी हो सकता है, "कुछ" भी हो सकता है... 
"कोई" से तो सभी इत्तेफ़ाक़ रखते होंगे...
यूँ कि, कई बार राब्तों में यूँ भी होता है,
कोई ज़रूरत से ज्यादा अज़ीज़ होता है। 
मगर ये "कुछ" क्या है... ज़ाहिर है, ये सवाल ज़ाहिर है... 
"कुछ"...... 
ये बड़ा ही मुनफ़रिद (unique) है.... 
किस्सा कुछ मेरा है इसीलिए ज़रा ज़्यादा तफ़सील है। 
"कुछ" वो कुछ भी हो सकता है,
जो एक शक़्श को बेहद मश्ग़ूल कर दे,
ख़ुद  में इतना मसरूफ़  कर दे,
जो शरीक़-ए-वक़्त हो इतना कि फ़ुरसतें नदारद कर दे... 
वो हर चीज़... "वो" "कुछ" बन जाती है,
किसी का शौक़, किसी की शौहरत,
किसी का ज़ुनून, किसी की ईबादत,
किसी की ख़ुदी, किसी की बेख़ुदी,
किसी के अपने, किसी के सपने, 
और किसी का फ़ोन. .... 
पति पत्नी और "वो"

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