जितनी तज़स्सुस से तु मेरी ख़ामोशी में अल्फ़ाज़ है तलाशता...
जितनी शिद्दत से तु मेरी खुश्ख निगाहों में अश्क है तलाशता...
जितनी मासूमियत से तु मेरी बेख़बरी में तवज्ज़ो है तलाशता....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....
जितने करीने से तु भीड़ में भी मुझसे जुड़ा रहता है....
जितनी वफ़ादारी से तु दूर होकर भी करीब रहता है...
जितनी सहुलियत से तु मुझे तेरे इश्क में सरोबार रखता है....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है.....
तुने मेरे लफ्ज़ नज़र अंदाज़ कर दिए , पर मौज़ूदगी उनकी हमारे दरमियाँ तु जानता है....
मेरी झूठी मुस्कुराहटों की तहों में छुपी नाराज़गी, तु जानता है....
जो मेरे दिल में टूटा सा है, उसका होना तु जानता है....
लगता है... कुछ तो इश्क बाकी है...
बेश़क नहीं मनाता मुझे तु, पर मैं रूठी हूँ इसका अहसास रखता है तु....
अहसान ही जता कर सही, पर मेरी ज़रूरतें पूरी करता है तु....
मेरी गैैरमौज़ूदगी में, मेरी जुस्तज़ू करता है तु....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....
मुझे रोज़ सताता है पर, बेहाली में खैर करता है तु....
मैं दर-नज़र करूँ तेरी नाराज़गी तो बार बार महसूस कराता है तु....
ना मनाउँ, तो और ज्यादा अकड़ता है तु....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....
ये नन्ही चिंगारियाँ... अब भी हमारे बीच है, ये अहसास कराता है तु..
हम एक ही राह के दो राही बन कर रहते हों बेशक, पर हमसफर भी है ये याद दिलाता है तु....
दूरियाँ अाज़िल है हमारे दरमियाँ, पर राबता अाज भी है, ये यकीन दिलाता है तु.....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है.....
तुने मेरे लफ्ज़ नज़र अंदाज़ कर दिए , पर मौज़ूदगी उनकी हमारे दरमियाँ तु जानता है....
मेरी झूठी मुस्कुराहटों की तहों में छुपी नाराज़गी, तु जानता है....
जो मेरे दिल में टूटा सा है, उसका होना तु जानता है....
लगता है... कुछ तो इश्क बाकी है...
बेश़क नहीं मनाता मुझे तु, पर मैं रूठी हूँ इसका अहसास रखता है तु....
अहसान ही जता कर सही, पर मेरी ज़रूरतें पूरी करता है तु....
मेरी गैैरमौज़ूदगी में, मेरी जुस्तज़ू करता है तु....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....
मुझे रोज़ सताता है पर, बेहाली में खैर करता है तु....
मैं दर-नज़र करूँ तेरी नाराज़गी तो बार बार महसूस कराता है तु....
ना मनाउँ, तो और ज्यादा अकड़ता है तु....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....
ये नन्ही चिंगारियाँ... अब भी हमारे बीच है, ये अहसास कराता है तु..
हम एक ही राह के दो राही बन कर रहते हों बेशक, पर हमसफर भी है ये याद दिलाता है तु....
दूरियाँ अाज़िल है हमारे दरमियाँ, पर राबता अाज भी है, ये यकीन दिलाता है तु.....
लगता है.... कुछ तो इश्क बाकी है....

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